Sunday, 25 September 2011

प्राणायाम :ऊर्जा का स्रोत

यह  संसार जड़ और चेतन  के समन्वित रूप में दृष्टिगत होता है |चेतना जीवन का पर्याय है और यौगिक दृष्टि से शरीर और मन को एक अदृश्य ऊर्जा संचालित करती रहती है जिसे प्राण वायु कहा जाता है | शरीर को प्रभावित करने वाली प्रत्येक वस्तु एवं प्रक्रिया का प्रभाव मन पर अवश्य पड़ता है और मन का शरीर पर |   चूकि मन सम्पूर्ण शरीर में अंतर्व्याप्त है और उसकी प्रत्येक अणु में भी प्रविष्टि है, अतः प्राणायाम के अभ्यास से मन स्वतः अनुशासित होता है |
शरीर का आधार प्राण है | प्राण की कमी से भी रोग उत्पन्न होते हैं | हमारे फेफड़े एक ही मिनट में सारे शरीर का रक्त शुद्ध कर देते हैं | इस प्रकार २४ घंटों में लगभग ८ टन रक्त शुद्ध करते हैं |यदि निरन्तर प्राणायाम करते रहें तो रक्त की विधवत शुद्धि होती रहेगी और शरीर में व्याप्त प्राणों व उप प्राणों में संतुलन भी बना रहेगा  और मन भी शांत रहेगा | नाड़ी- शोधन,भस्त्रिका ,शीतली ,शीतकारी, चन्द्र्भेदी ,उज्जायी ,सूर्यभेदी,आदि प्राणायाम से अतिरिक्त ऊर्जा की प्राप्ति होती रहेगी | 
        प्राणायाम जीवन ऊर्जा का अभिस्रोत है और हमारा सम्पूर्ण शरीर ऊर्जाओं का केंद्र है |यही ऊर्जा जीवन को संचालित करती रहती है और इसके अभाव में जीवन समाप्त हो जाता है |इस तथ्य को समस्त वैज्ञानिक किसी न किसी रूप में स्वीकार करते हैं कि हमारा शरीर ऊर्जा का स्रोत है |जिस प्रकार परमाणु बम में ऊर्जा के अणु होने के कारण ही उनमें विस्फोटक शक्ति अंतर्निहित होती है उसी प्रकार हमारे शरीर में ऊर्जा का महासागर लहराता है |
प्राण वायु को ही वैज्ञानिक भाषा  में ऊर्जा कहा जाता है |यह ऊर्जा हमें जन्म के साथ ही प्राप्त हो जाती है जो निरंतर हमारे जीवन को संचालित करती रहती है |जीवन श्वासों में है इसलिए जो व्यक्ति आधी श्वास लेता है वह अर्धजीवित होता है |यौगिक प्राणायाम हमारे मानस पर यह अंकित करता है कि हम जिस प्रकार श्वास लेते हैं उसका प्रत्यक्ष प्रभाव शरीर और मन दोनों पर पड़ता है और यही हमारे आयु को निर्धारित करती हैं |हमारा शरीर बिना भोजन  व पानी के कुछ दिनों तक तो  चल सकता है किन्तु वायु के आभाव में उसका अंत कुछ ही मिनट में हो जाता है |प्राण स्वयम हवा नहीं है किन्तु हवा से प्राप्त जीवनदायी शक्ति अवश्य है |शरीर में जितनी अधिक जीवनी शक्ति होगी उसी मात्रा  में हमारा जीवन सशक्त होता है |प्राणायाम का मूलभूत उद्देश्य यह है कि फेफड़ों का पूर्ण उपयोग किया जाये और उनसे जीवनीशक्ति अधिकाधिक ग्रहण की  जाये |अधिक प्राण से हमारा रक्त ,रंग और सामान्य स्वास्थ्य संतुलित होता है |प्राणायाम का दूसरा उद्देश्य श्वास को धीरे धीरे लेने और यथासम्भव व्यवस्थित होने में सहायक होना भी है |तेजी से श्वास लेने से आयु का ह्रास होता है और मंद श्वास लेने से प्राण वायु सशक्त होकर हमें दीर्घायु प्रदान करती है |धीरे धीरे श्वास लेने के कारण ही कछुवा लगभग ढाई सौ साल जीता है जबकि जल्दी जल्दी श्वास लेने के कारण कुत्ता बीस साल ही जी पाता है |
चूंकि शक्ति के अत्यंत सूक्ष्म रूपों में से वायु एक है ;अतः यह व्यापक शक्ति जो मानव शरीर में भी व्याप्त है ,शक्ति द्वारा सम्पादित किये जाने वाले विविध कार्यों को हठयोग नाम देते हुए  इसके पाँचरूप बताये गये हैं ;जैसे प्राण ,अपान,समान ,उदान और व्यान |
हमारे शरीर कि ऐसी वैज्ञानिक व्यवस्था है कि शरीर की  ऊर्जा तब तक कार्यशील नहीं होती जब तक  उसे स्पंदित न किया जाये |यह स्पन्दन प्राणायाम के माध्यम से शरीर की  अनेकों ऊर्जाओं को संचालित करता है और संचालित ऊर्जा घर्षण शक्ति उत्पन्न करती है जिसे हम जीवनी शक्ति के रूप में भी जानते हैं |हमारे फेफड़ों में असंख्य छिद्र होते हैं जो फिल्टर का  काम करते हैं |यदि हम गहरी और लम्बी सांस नहीं ले पाते  तो फिल्टर की क्रिया उतनी तेजी से नहीं हो पाती है |आक्सीजन की कमी के कारण हम असाध्य रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं |अतः आक्सीजन जो हमें प्राण वायु प्रदान करता है ,को प्राणायाम के माध्यम से सशक्त कर सकते हैं | प्राणायाम के द्वारा ही हम शरीर की प्राणवायु को नियंत्रित करते हैं और तभी हमारा मन एकाग्र होता है | प्राणायाम मन को एकाग्र करने का एक सहज और सरल माध्यम है |
प्राणायाम के अंतर्गत नाडी शोधन क्रिया से सम्पूर्ण शरीर और मन को तत्काल शांति  एवं स्थिरता मिलती है और रासायनिक प्रतिक्रिया की पद्धति में तेजी और वृद्धि करता है |विषाक्त तत्व कार्बन आक्साइड तथा अन्य अशुद्धियों को दूरकर शरीर को स्वस्थ बनाता है |
भस्त्रिका प्राणायाम कार्बन आक्साइड को समाप्त कर फेफड़ों को शुद्ध करता है |दमा और सर्दी जुकाम ठीक करने में तथा मोटापा घटाकर रक्त चाप को नीचे से ऊपर बढ़ाने में सहायक होता है |इसके अभ्यास से शरीर  में गर्मी और जाड़े के समय सर्दी कम लगती है |
भ्रामरी प्राणायाम उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है  |क्रोध और चिन्ता के कारण हुए मानसिक तनाव को घटाने में सहायक होता है |यह सिरदर्द को तत्काल दूर कर गहरी नींद लाता है |
उज्जायी प्राणायाम  गले के संक्रामक रोग की रोकथाम करता है तथा कफ ,बदहजमी ,जुकाम को नियंत्रित करता है |यह हृदयरोग की बीमारियों को भी दूर करता है तथा आक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर स्नायु व्यवस्था में स्थिरता लाता है और आनन्द की अनुभूति भी कराता है |
श्वास की गति को नियंत्रित करने की प्रक्रिया "विपश्यना" कहलाती है |हमारे शरीर में श्वास कैसे प्रविष्ट होकर कहाँ कहाँ रुकते हुए शरीर में कौन कौन सी क्रिया प्रतिक्रिया करती है ,इसका ज्ञान प्राणायाम के माध्यम से ही होता है |अतः स्वस्थ जीवन के लिए प्राणायाम एक महत्वपूर्ण क्रिया है और हमें दीर्घायु बनाने का अलौकिक वरदान भी है |
                     सर्वे  भवन्तु  सुखिनः  सर्वे  सन्तु  निरामयः|
                    सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्  दुःख भाग्भवेत |