Wednesday, 6 May 2015

''रसिकाचार्य श्री करूणासिन्धु जी महाराज'' को पुष्पांजलि

।। श्री सीतारामाभ्यां नम:।।              ।। श्रीमते करूणासिन्धुवे नम:।।

''रसिकाचार्य श्री करूणासिन्धु जी महाराज'' को
पुष्पांजलि
अथक  कर्मरत, अविरत जाग्रत, बहुविधि अथ-इति ज्ञाता।
अगणित संत  उपकृत  तुमसे, रास  रसिक फल  दाता।।
श्री मानस ललित ललाम सुटीका आनन्द लहरि प्रदाता।
  यश वैभव से अभिसिंचित हो , यश: शेष  तव  गाथा।।1।।

रसिकाचार्य, धर्म संरक्षक, तुलसी रामायण उदगाता।
स्मृति, वेद, पुराण आदि के  प्रखर प्रवर व्याख्याता।।
चारूशिला प्रिय सन्त शिरोमणि, धर्म सनातन त्राता।
          भक्ति - मार्ग के संवाहक हो , शत धर्म.ग्रन्थ निर्माता ।।2।।

करूणा की प्रतिमूर्ति कहूँ या, भक्त् शिरोमणि  पण्डित ।
   सहृदयसरल, विवेकी, सदगुण, मनुज-प्रेम से स्पन्दित  ।।
राम भक्तिमय, ज्ञान  सिन्धु हे, रूणासिन्धु  सुमण्डित  ।
     श्रद्धा  के कुछ शब्द.पुष्प, अब गुरूवर है  तुमको  अर्पित ।।3।।

श्री हनुमत्कृपा प्राप्त निज पथ पर, द्विजवर भाव.प्रबल ।
  स्वजन्म भूमि से सरयू तट तक, चले सतत अविचल ।।
  हुआ प्रकाशित 'गढ़ प्रताप',ग्राम  गोपालापुर शुभ  स्थल ।
     पूज्य पितामह साथ रहें, बन धतुरा-कुल के सम्बल।।4।

                             डा0 जटाशंकर त्रिपाठी ''जिज्ञासु 

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